Tuesday, May 15, 2018

Mumtaj or Sahajaha ki history

इश्क एक इबादत है तो ताजमहल उस इबादत की जानदार तस्वीर, मोहब्बत की इस अजिमोशान ईमारत को देखकर लोग आज भी प्यार पर भरोसा करते है, क्योकि इस प्यार में समर्पण, त्याग, ख़ुशी और वो सबकुछ है जो इश्क को मुकम्मल जहा देता है।प्यार की मिसाल माना जाने वाला दुनिया का यह अजूबा, भारत का गर्व है। इस अद्भुत स्मारक को सफ़ेद संगमरमर से शाहजहाँ द्वारा उसकी बेगम मुमताज़ की याद में बनवाया गया था। दुनिया का हर एक इंसान आज ताजमहल देखने की चाह रखता है क्योकि इसे मोहब्बत का मंदिर कहा जाता है। यमुना नदी के किनारे पर स्थित यह ईमारत एकविस्मरणीय स्थल है।पर्शियन बेगम मुमताज़ महल की मृत्यु अपने चौदहवे बच्चे को जन्म देते समय हो गयी, उनके चौदहवे बच्चे का नाम गौहर बेगम था। Taj Mahal का निर्माण मुग़ल सम्राट शाहजहाँ (शासनकाल 1628 से 1658) ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था, ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ।शाहजहाँ चाहते थे की दुनिया मुमताज़ और उनकी प्रेम कहानी को हमेशा याद रखे, इसीलिए उनकी याद में वे कुछ इतिहासिक धरोहर बनाना चाहते थे। जिसमे ताजमहल का निर्माण हुआ।ताजमहल का निर्माण लगभग 1643 में ही ख़त्म हो गया था लेकिन फिर भी उसकी सुंदरता को बढ़ाने के लिये और 10 सालो तक काम किया गया। ताजमहल का निर्माण तक़रीबन 1653 में पूरा हो गया था और उस समय उसे बनाने में लगभग 32 मिलियन रुपयों का खर्चा लगा था, ताजमहल का निर्माण जानकारी के अनुसार 25000+ कारीगरों ने किया था
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2007 में, ताजमहल को दुनिया के 7 आश्चर्य की सूचि में भी शामिल किया गया था।हर साल ताजमहल को लगभग 9 से 10 मिलियन लोग देखने आते है। बेगम मुमताज़ महल कब्र कभी बड़ी और सफ़ेद मार्बल से बनी हुई, उनकी कब्र को काफी अलंकृत किया गया है। मुस्लिम परंपरा के अनुसार कब्र की विस्तृत सज्जा मन है। इसलिए शाहजहाँ एवं मुमताज़ के पार्थिव शरीर इसके निचे तुलनात्मक रूप से साधारण, असली कब्रों में दफ्न है, जिनके मुख दाये एवं मक्का की तरफ है।ताजमहल के मध्य में मुमताज़ महल कब्र को रखा गया है
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यमुना नदी के किनारे सफ़ेद पत्थरो से निर्मित अलौकिक सुंदरता की तस्वीर “ताजमहल” न केवल भारत में, बल्कि पुरे विश्व में अपनी पहचान बना चूका है। प्यार किस इस निशानी को देखने के लिये दूर देशो से हजारो लोग यहाँ आते है। दुधिया चांदनी में नाहा रहे ताजमहल की खूबसूरती को निहारने के बाद आप कितनी भी उपमाये दे, वह सारी फीकी लगती है।ऐसा कहा जाता है जिन कारीगरों ने ताजमहल का निर्माण किया था, शाहजहाँ ने निर्माण होने के बाद उन कारीगरों के हात कटवा दिए थे। इस प्रकार के कई दावे ताजमहल को लेकर इतिहास में किये जाते है। इस ईमारत का निर्माण सदा से प्रशंसा एवं गर्व का विषय रहा है। इसने धर्म, संस्कृति एवं भूगोल की सीमाओ को पार करके लोगो के दिलो से व्यक्तिगत एवं भावनात्मक प्रतिक्रिया कराइ है। आज भी लोग लोग ताज महल को शाहजहाँ और मुमताज़ के मोहब्बत की निशानी मानते है। आज विश्व के सबसे सुन्दर भवनों में से एक ताजमहल है।कहा जाता है की मुमताज़ की मृत्यु का शाहजहाँ पर काफी असर हुआ था उनकी मृत्यु के बाद से ही शाहजहाँ की हालत भी काफी ख़राब हो गयी थी। कहा जाता है की शाहजहाँ मरते दम तक मुमताज़ को भूल नही पाए थे
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ताजमहल को शाहजहाँ की तीसरी और सबसे प्रिय पत्नी मुमताज़ महल की याद में बनाया गया था और उसे बनाने में तक़रीबन 18 साल लगे थे।और ये बहुत ही सुंदर हैं !
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Monday, May 14, 2018

THE BEAUTIFUL NATURE

सभी चीजें कृत्रिम हैं, क्योंकि प्रकृति ईश्वर की कला है.
  • मैंने पूरी ज़िन्दगी वहां कांटे निकालने और फूल लगाने का प्रयास किया है जहाँ वो विचारों और मन में बड़े हो सके.अनुकूल बनें या नष्ट हो जाएं, अब या कभी भी, यही प्रकृति कि निष्ठुर अनिवार्यता है.पानी की याददाश्त उत्तम होती है,वो हमेशा वहीं जाने का प्रयास करता हैऔर वो दिन आ गया जब कली के अन्दर बंद रहने का जोखिम खिलने के जोखिम से अधिक दर्दनाक था.पतझड़ एक दूसरे बसंत की तरह है जब सभी पत्तियां फूल बन जाती हैं.पक्षी तूफ़ान गुजरने के बाद भी गाना गाते हैं; क्यों नहीं लोग भी जो कुछ बचा है उसी में प्रसन्न रहने के लिए खुद को स्वतंत्र महसूस करते हैं .चीजों के प्रकाश में सामने आओ, प्रकृति को को अपना शिक्षक बनने दो.पृथ्वी और आकाश, जंगल और मैदान ,झीलें और नदियाँ , पहाड़ और समुद्र, ये सभी उत्कृष्ट शिक्षक हैं, और हम में से कुछ को इतना कुछ सीखाते हैं जितना हम किताबों से नहीं सीख सकते. हर फूल प्रकृति में खिली आत्मा है.Image result for beautiful nature
  • अपनी पहली सांस लेने के पहले के नौ महीने छोड़ दिया जाए तो इंसान अपने काम इतने अच्छे ढंग से नहीं करता जितना कि एक पेड़ करता है .फूल सबसे प्यारी चीजें हैं जिसे भगवान ने बनाया पर उसमे आत्मा डालना भूल गए.आशा ही एक ऐसी मधुमक्खी है जो बिना फूलों के शहद बनाती है.मेरा मानना है कि यदि कोई हमेशा आकाश की तरफ देखे तो उसके पर निकल आयेंगे.प्रकृति की सभी चीजों में कुछ ना कुछ अद्भुत है.अपना चेहरा सूर्य के प्रकाश के तरफ रखिये और आपको कोई परछाई नहीं दिखाई देगी
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  • मनुष्य ने आगे की चीजें देखने और अनुमान लगाने कि क्षमता गवां दी है. उसका अंत पृथ्वी का विनाश करने से होगा
  • . प्रकृति माँ इस साल भले माफ़ कर दें , या अगले साल भी, पर अंत में वो आएँगी और आपको सजा देंगी. आपको तैयार रहना होगा.यही सोचेंगे की हम हर समय ख़ुशी से पागल रहते होंगे कि हमारे पास ऐसी चीजें हैं.कुछ लोग बरसात में चहलकदमी करते हैं,और बाकी बस भीगते हैंवो जो मधुमक्खी के छत्ते के लिए ठीक नहीं है वो मधुमक्खी के लिए भी अच्छा नहीं हो सकता.
  • आप सबको प्रकृति  और मनुष्य का क्या relation है ये तो पता ही होगा । पर मै आज आपसे मनुष्य और प्रकृति  के एक अलग ही relationship के बारे मे बात करूँगा। और वो रिलेशन है Teacher और  Student का । जी हाँ , प्रकृति  ही हमारी सबसे बड़ी Teacher है। ये हमे हर पल कुछ न कुछ सीखाती रहती है बस जरूरत है तो थोड़ा ध्यान देने का । आज तक मनुष्य ने जो कुछ भी हासिल किया है वो प्रकृति  से सीख लेकर ही किया है। न्यूटन को gravity का पाठ प्रकृति  ने ही सीखाया है। कई अविष्कार भी प्रकृति  से प्रेरित है। इन सबके अलावा प्रकृति  हमे ऐसे गुण भी सीखाती है जिससे हम अपने जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन ला सकते है और इसे बेहतर बना सकते हैँ। वैसे इसकी List तो बहुत लम्बी हो सकती है पर मै यहाँ ऐसी 5 चीजे ही share कर रहाँ हूँ जो हम प्रकृति  से सीख सकते है:
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NATURE से हमे सब  कुछ मिलता हैं .हम सब प्रकृति के ही बच्चे हैं .प्रकृति से हमे सुन्दरता मिलती हैं .हम जो भी चाहे प्रकृति से ले सकते हैं .हमे NATURE के बारे में सोचना चाहिए की प्रकृति ने हमे कितना कुछ दिया हैं !
इतने सुंदर फुल ,पेड,नदियाँ,झीले ,नहरे ,आसमान.बादल ,मौसम ,बारिश .ये सब इतने सुंदर दृश्य हैं !लोग इन सब के बारे में नहीं सोचते हैं . अगर हम IMAGINE करे तो प्रकृति बहुत ही सुंदर हैं .हमारे आस पास देखने को भी बहुत कुछ हैं .हमे सोच के देखना चाहिए की हमारा WORLD बहुत ही अच्छा हैं ! 

virendavan की होली

पूरे एक हफ्ते तक रोज ब्रज में अलग-अलग जगह, अलग-अलग होली मनाई जाती है,

भारत में हर त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. लेकिन इन सब में होली की जगह अलग है. इस होली में भी ब्रज की होली की छटा अलग है, कहते हैं कि जग में होली ब्रज में होला.. बाकी ज्यादातर जगहों पर जहां होली 1 दिन खेली जाती है, वहीं मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, बरसाने में कुल एक हफ्ते तक होली चलती है. हर दिन एक अलग तरह की होली होती है. तो आप भी याद कर लीजिए ब्रज की होली की अलग-अलग तारीखें और घूम आइए मथुरा-वृंदावन.
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वृंदावन में देश के कई कोनों से आई विधवाएं रहती हैं. परिवार के लोग इन्हें यहां छोड़ देते हैं. रूढ़िवादी सोच में इन विधवाओं की होली से हर तरह का रंग खत्म कर दिया जाता है. कुछ ही साल पहले वृंदावन में विधवाओं की होली का चलन पागल बाबा के मंदिर से शुरू हुआ. अमूमन ये होली फूलों की होली के अगले दिन अलग-अलग मंदिरों में खेली जाती है.

होली 2018: शुरू हो गई ब्रज की हफ्ते भर की होली, जाने किस दिन है क्या

पूरे एक हफ्ते तक रोज ब्रज में अलग-अलग जगह, अलग-अलग होली मनाई जाती है,

FP Staff Updated On: Feb 24, 2018 09:35 PM IST

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होली 2018: शुरू हो गई ब्रज की हफ्ते भर की होली, जाने किस दिन है क्या
भारत में हर त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है. लेकिन इन सब में होली की जगह अलग है. इस होली में भी ब्रज की होली की छटा अलग है, कहते हैं कि जग में होली ब्रज में होला.. बाकी ज्यादातर जगहों पर जहां होली 1 दिन खेली जाती है, वहीं मथुरा, वृंदावन, गोकुल, नंदगांव, बरसाने में कुल एक हफ्ते तक होली चलती है. हर दिन एक अलग तरह की होली होती है. तो आप भी याद कर लीजिए ब्रज की होली की अलग-अलग तारीखें और घूम आइए मथुरा-वृंदावन.
लठमार होली
लठमार होली
लठमार होली
बरसाने की लठमार होली की शुरुआत शुक्ल पक्ष की नवमी को होती है. 2018 में 24 फरवरी को लठमार होली से एक हफ्ते चलने वाले होली के सप्ताह की शुरुआत होगी. नंदगांव (कृष्ण के गांव) के लड़के बरसाने जाते हैं और गोपियां उनके पीछे लठ लेकर भागती हैं और उन्हें मारती(प्रेम से) हैं.
वहीं पुरुष स्त्रियों के इस लठ के वार से बचने का प्रयास करते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह परंपरा तब से है जब श्री कृष्ण होली के समय बरसाने आए थे. तब कृष्ण राधा और उनकी सहेलियों को छेड़ने लगे. उसके बाद राधा अपनी सखियों के साथ लाठी लेकर कृष्ण के पीछे दोड़ने लगीं. बस तब से बरसाने में लठमार होली शुरू हो गई. अगर आपको लठमार होली देखने जाना है तो 24 फरवरी को बरसाना और 25 फरवरी को नंदगांव जा सकते हैं.
वृंदावन की फूलों वाली होली
फूलों की होली
फूलों की होली
फागुन की एकादशी को वृंदावन में फूलों की होली मनाई जाती है. बांके बिहारी मंदिर में फूलों की ये होली सिर्फ 15-20 मिनट तक चलती है. शाम 4 बजे की इस होली के लिए समय का पाबंद होना बहुत जरूरी है. इस होली में बांके बिहारी मंदिर के कपाट खुलते ही पुजारी भक्तों पर फूलों की वर्षा करते हैं. 2018 में ये होली 26 मार्च यानी सोमवार को होगी.
विधवाओं की होली
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वृंदावन में देश के कई कोनों से आई विधवाएं रहती हैं. परिवार के लोग इन्हें यहां छोड़ देते हैं. रूढ़िवादी सोच में इन विधवाओं की होली से हर तरह का रंग खत्म कर दिया जाता है. कुछ ही साल पहले वृंदावन में विधवाओं की होली का चलन पागल बाबा के मंदिर से शुरू हुआ. अमूमन ये होली फूलों की होली के अगले दिन अलग-अलग मंदिरों में खेली जाती है.
जीवन के रंगों से दूर इन विधवाओं को होली खेलते देखना बहुत सुंदर होता है. इसीलिए 2013 में शुरू हुआ ये इवेंट वृंदावन की होली के सबसे लोकप्रिय इवेंट में से एक हो गया है. 2018 की विधवाओं की होली राधा-गोपीनाथ मंदिर में मंगलवार 27 फरवरी को खेली जाएगी. इसका आयोजन सुलभ एनजीओ करता है.
बांके बिहारी मंदिर में रंगों की होली
होली है
होली है
वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में होली का जश्न दुनिया भर में चर्चित है. भक्त अपने भगवान के साथ होली खेलते हैं. मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालु अपने प्रभु पर रंग बरसाने के लिए टूट पड़ते हैं. इस होली में कई क्विंटल गुलाल और रंग बरसाया जाता है. आमतौर पर महिलाएं इस होली से दूर रहती हैं. 1 मार्च 2018 को होने वाली ये होली सुबह 9 बजे से 1.30 तक चलेगी.
इस होली के तुरंत बाद मथुरा में होली का जुलूस निकलता है. दोपहर 2 बजे से निकलने वाले इस जलसे में हिस्सा लेना एक दूसरी ही दुनिया का अनुभव है.

मरने के बाद आत्मा कहा जाती हैं !

मृत्यु का पूर्वाभास इंसान को हो जाता हे उसी तरह से यह भी कहा जाता है कई योनियों के चक्र को पूरा करने के बाद हमे मानव जीवन मिलता हैं !













पुराणों के अनुसार जब भी कोई मनुष्य मरता है और आत्मा शरीर को त्याग कर यात्रा प्रारंभ करती है तो इस दौरान उसे तीन प्रकार के मार्ग मिलते हैं. उस आत्मा को किस मार्ग पर चलाया जाएगा यह केवल उसके कर्मों पर निर्भर करता है.ये तीन मार्ग हैं अर्चि मार्ग, धूम मार्ग और उत्पत्ति-विनाश मार्ग. अर्चि मार्ग ब्रह्मलोक और देवलोक की यात्रा के लिए होता है, वहीं धूममार्गपितृलोक की यात्रा पर ले जाता है और उत्पत्ति-विनाश मार्ग नर्क की यात्रा के लिए है.मृतक चाहे स्त्री हो या पुरुष अंतिम क्रिया पुत्र की संपन्न करता है। इस संबंध में हमारे शास्त्रों में उल्लेख है कि पुत्र पुत नामक नर्क से बचाता है अर्थात् पुत्र के हाथों से मुखाग्नि मिलने के बाद मृतक को स्वर्ग प्राप्त होता है। इसी मान्यता के आधार पर पुत्र होना कई जन्मों के पुण्यों का फल बताया जाता है। पुत्र माता-पिता का अंश होता है। इसी वजह से पुत्र का यह कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता की मृत्यु उपरांत उन्हें मुखाग्नि दे। इसे पुत्र के लिए ऋण भी कहा गया है।

अंत समय का एहसास करवाते हैं मृत्यु पूर्वाभास

समय बीतने के साथ अगर कोई व्यक्ति अपनी नाक की नोक देखने में असमर्थ हो जाता है तो इसका अर्थ यही है कि जल्द ही उसकी मृत्यु होने वाली है. क्‍योंकि उसकी आंखें धीरे-धीरे ऊपर की ओर मुड़ने लगती हैं और मृत्‍यु के समय आंखें पूरी तरह ऊपर की ओर मुड़ जाती हैं. बुरे कर्मो के लोगो के साथ कभी आग में जलाया जाता हैं कभी साप खाते हैं कभी गरम तेल में डाला जाता हैं .बुरे कर्मो की सजा तो जरुर मिलके ही रहती हैं .इससे आज तक कोई नही बच पाया .

Saturday, May 12, 2018

मोदी के नेपाल में मंदिर दौरों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

दो दिवसीय दौरे पर नेपाल गए पीएम मोदी शुक्रवार को जानकी माता के मंदिर गए थे. जिसके बाद आज सुबह वह मुक्तिनाथ मंदिर पहुंचे. यहां जाने वाले वह पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं. काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर गए.
कर्नाटक में वोटिंग के दौरान पीएम मोदी का विदेश में इस तरह मंदिर जाने पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं.  इस दौरान पीएम मोदी ने वोटरों को प्रभावित करने के लिए नेपाल में मंदिर जाने की योजना बनाई. गहलोत ने कहा कि यह सिर्फ वोटरों को प्रभावित करने के लिए किया गया है, जो कि लोकतंत्र के लिए सही परंपरा नहीं है. गहलोत ने कहा कि पीएम मोदी ने मंदिर जाने के लिए आज ही दिन क्यों चुना?एक तरफ कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग चल रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने नेपाल दौरे पर अलग-अलग मंदिरों में जाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं.सिद्धारमैया ने दावा किया कि कांग्रेस पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी, इसमें कोई संदेह नहीं है. उन्होंने कहा कि हम पूरी तरह आश्वस्त हैं. वहीं, येदियुरप्पा के जीत के दावे पर सिद्धारमैया ने कहा कि उनका दिमागी संतुलन बिगड़ा हुआ है. दरअसल, येदियुरप्पा ने वोटिंग करते वक्त कहा था कि बीजेपी 150 से ज्यादा सीट जीतेगी और 17 तारीख को वह सीएम पद की शपथ लेंगे.पीएम मोदी के नेपाल दौरे का आज दूसरा दिन

जानिए Golden Tample की कुछ अनोखी बात !

ऐसा एक सुन्दर गुरुद्वारा अमृतसर के बीच में स्थापित है, जहा आज भी दुनिया भर से लाखो श्रद्धालु आते है. इस मंदिर का मुख्य केंद्र बिंदु इसपर सोने की परत चढ़ी होना है.यह बहुत ही ज्यादा सुन्दर हैं !लोग दूर-दूर से इसे देखने क लिए आते हैं .हरमंदिर साहिब बनाने का मुख्य उद्देश्य पुरुष और महिलाओ के लिये एक ऐसी जगह को बनाना था जहा दोनों समान रूप से भगवान की पूजा  कर सके. सिख महामानवों के अनुसार गुरु अर्जुन को मुस्लिम सूफी संत साई मियां मीर ने आमंत्रित किया था.हरमंदिर साहिब को सिखो का देवस्थान भी कहा जाता है
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हरमंदिर साहिब में बने चार मुख्य द्वार सिखो की दूसरे धर्मो के प्रति सोच को दर्शाते है, उन चार दरवाजो का मतलब कोई भी, किसी भी धर्म का इंसान उस मंदिर में आ सकता है. वर्तमान में तक़रीबन 125000 से भी जादा लोग रोज़ स्वर्ण मंदिर में भक्ति-आराधना करने के उद्देश्य से आते है और सिख गुरुद्वारे के मुख्य प्रसाद ‘लंगर’ को ग्रहण करते है.. गुरु अमर दास ने गुरु राम दास को एक अमृत टाँकी बनाने का आदेश दिया, ताकि सिख धर्म के लोग भी भगवान की आराधना कर सके. तभी गुरु राम दास ने सभी सिखो को अपने इस काम में शामिल कर लिया था. उनका कहना था की यह अमृत टाँकी ही भगवान का घर है. यह काम करते समय गुरु पहले जिस झोपडी में रहते थे उसे  सब  गुरु महल के  नाम से जानते हैं .रात के समय ये बहुत ही सुंदर दिखाई देता हैं !                             Image result for golden temple                                                                                                                                      बैसाखी जो अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह में मनाया जाता है. इसी दिन सिख लोग खालसा की स्थापना का उत्सव भी मनाते है. सिखो के दूसरे महत्वपूर्ण दिनों में गुरु राम दास का जन्मदिन, गुरु तेग बहादुर का मृत्युदिन, सिख संस्थापक गुरु नानक देव का जन्मदिन इत्यादि शामिल है दीवाली के दिन दियो और कंदिलो की रौशनी में स्वर्ण मंदिर की सुंदरता देखने लायक होती है. इस दिन स्वर्ण मंदिर को दियो और लाइट से सजाया जाताश्री हरमंदिर साहिब के नाम का अर्थ “भगवान का मंदिर” हैआप चारो दिशाओ से इस मंदिर में प्रवेश कर सकते हो क्योकि चारो दिशाओ में इस मंदिर के प्रवेश द्वार बने हुए है. और यह लोगों की एकता को दर्शाता है.                                                                                                                                                                   मृत सरोवर को सबसे पवित्र सरोवर भी माना जाता है.यह हिन्दू मंदिरो के बिल्कुल विरुद्ध है, क्योकि हिन्दुओ के बहोत से मंदिर जमीन से थोड़े ऊँचे बने हुए होते है.इस मंदिर को बार-बार कई बार उजाड़ा गया था, पहले मुघल और अफगानों ने और फिर भारतीय आर्मी और आतंकवादियो के मनमुटाव में. और इसी वजह से इसे सिख धर्म की विजय का प्रतिक भी माना जाता है.देश ही नही बल्कि विदेशो से भी लोग आते है और इसकी लंगर सेवा भी दुनिया की सबसे बड़ी सेवा है,Image result for golden temple

Thursday, May 10, 2018

ईस्टन एक्सप्रेस वे क्या होगा कोर्ट का परिणाम देखे

अब 31 मई तक नहीं हुआ ईस्टन एक्सप्रेस वे का उद्घाटन

पलवल से कुंडली के बीच ईस्टन एक्सप्रेस वे के शुरू ना होने पर नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत के लिए PMO की हरी झंडी का इंतजार क्यों?कोर्ट ने कहा कि ईस्टन एक्सप्रेस वे को शुरू करने के लिए PM से शुभारंभ करने का इंतजार क्यों हो रहा है? इसे जनता के लिए शुरू किया जाए. जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा कि हमें भरोसा दिलाया गया था कि अप्रैल में PM इसका शुभारंभ करेंगे, लेकिन मीडिया रिपोर्ट कहती है कि PM आज या कल में यहां उपलब्ध नहीं है. इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेघलाय कोर्ट पांच साल से काम कर रहा है जबकि अभी तक उसका शुभारंभ नहीं हुआ. NHAI ने कहा कि हमनें PMO को इसके लिए कहा है. तब कोर्ट ने कहा कि अगर वो नहीं करते तो आप ही क्यों नहीं कर देते आप लोगों ने इस पर मेहनत की है. आप ASG से भी ये करा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में 18 अप्रैल को NHAI ने कहा था कि अप्रैल के अंत में उसका इनोगरेशन हो जाएगा लेकिन नहीं हुआ. ईस्टन एक्सप्रेस वे 135 किलोमीटर का है. इसमें ज्यादा देरी दिल्ली की जनता के हित में नहीं है.  वेस्टन एक्सप्रेस को हरियाणा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि इस एक्सप्रेस का 81 फीसदी काम पूरा हो गया है, जबकि फरवरी 2019 की काम पूरा करने को लेकर डेड लाइन दी हुई है.



रिटायर हो रहे सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस चेलामेश्वर का फेयरवेल में जाने से इनकार

हरियाणा सरकार ने कहा कि जून 2018 तक हम काम पूरा कर लेंगे. जिस पर कोर्ट ने कहा कि काम पूरा होते ही इसका इनॉगरेशन किया जाए और जनता के लिए वेस्टन एक्सप्रेस को खोला जाएगा.  NHAI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि PM को 29 अप्रैल को इसका शुभारंभ करना था लेकिन वो नहीं कर पाए.
 

खास बातें

  1. इसकी शुरुआत के लिए PMO की हरी झंडी का इंतजार क्यों?
  2. हमें भरोसा दिलाया गया था कि अप्रैल में PM इसका शुभारंभ करेंगे
  3. मेघलाय कोर्ट 5 साल से काम कर रहा है जबकि अभी तक उसका शुभारंभ नहीं हुआ
नई दिल्ली: पलवल से कुंडली के बीच ईस्टन एक्सप्रेस वे के शुरू ना होने पर नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसकी शुरुआत के लिए PMO की हरी झंडी का इंतजार क्यों? सुप्रीम कोर्ट ने NHAI को कहा कि इस महीने के अंत तक यानी 31 मई तक शुभारंभ नहीं भी होता तो 1 जून से जनता के लिए इसे खोला जाए.

कांग्रेस के मेनिफेस्‍टो के खिलाफ दाखिल याचिका SC ने की खारिज, कहा- चुनाव की इस स्टेज पर दखल नहीं दे सकते
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जाने Celine Dion की life

पॉप गायिका Celine Dion का कहना है कि अब गानों का वह अर्थ नहीं रह गया है, जो पहले हुआ करता था। अब गानों का अर्थ बदल गया है। Dion (47) ने पिछले साल अगस्त के बाद पहली बार गुरुवार को लास वेगास में प्रस्तुति दी। उनके Husband रेने एंजेलिल (73) गले के कैंसर से जूझ रहे हैं।

इनका सबसे Super Hit Song हैं every night in my drems .ये song पूरे world में सभी को पसंद आया हैं .ये song TITANIC movie का हैं !
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उन्हें कई बार रोते और रुमाल से अपने आंसू पोंछते देखा गया।रेने के निधन के दो दिन बाद DION के भाई का भी कैंसर से निधन हो गया था। DION के लिए यह दोहरा झटका था।

वेबसाइट ‘ऐसशोबिज डॉट कॉम’ की रिपोर्ट के अनुसार, रेने की शोक सभा में डियोन के साथ उनके हजारों प्रशंसक व जानने वाले मौजूद थे।काले लिबास में पहुंचीं शोकाकुल डियोन ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया। उनके FACE से उनका दुख साफ झलक रहा था।

Wednesday, May 9, 2018

जानिए: 6 राज्यों में CASH संकट, दर-दर भटक रहे लोग

देश के कई राज्यों में CASH संकट एक बार फिर गहरा गया है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड समेत गुजरात में बैंकों और ATM में कैश नहीं है. सबसे ज्यादा शिकायतें ग्रामीण इलाकों से आ रही हैं. लोग कैश पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. आइए जानते हैं किस राज्य में क्या हैं हालात..


Bihar: कैश संकट का सबसे ज्यादा असर यदि किसी राज्य में है तो वो है बिहार. यहां पटना, बेगुसराय, सीवान, छपरा, सहरसा, भागलपुर समेत कई शहरों में लोग कैश पाने के लिए भटक रहे हैं. एटीएम और बैंक में भी नोट नहीं है. पटना के सबसे वीआईपी इलाके राजभवन के एटीएम में भी कैश नहीं है. इसी इलाके में राज्यपाल और सीएम नीतीश कुमार का आवास है.सहरसा में सभी बैंकों के करीब 150 एटीएम हैं, लेकिन एसबीआई के दो या तीन एटीएम से ही कैश निकल रहा है. भागलपुर में कुछ बैंक अधिकारियों का कहना है कि 2000 नोट आना बंद हो गया है. मोतिहारी में भी यह हालात पिछले एक सप्ताह से बने हुए हैं. औरंगाबाद में तो लोगों ने कैश ना मिलने की वजह से गोह-गया सड़क को जाम कर दिया.आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कैश संकट पर सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बिहार में विगत कई दिनों से अधिकांश ATM बिल्कुल ख़ाली है. लोगों के सामने गंभीर संकट है. लोगों का बैंकों में जमा अपना पैसा भी बैंक ज़रूरत के हिसाब से उन्हें नहीं दे रही है. नोटबंदी घोटाले का असर इतना व्यापक है कि बैंको ने हाथ खड़े कर रखे है. नए नोट सर्कुलेशन से क्यों ग़ायब है?
झारखंड: बिहार के बाद झारखंड कैश संकट से जूझ रहा है. झारखंड के बैंकों में पटना के आरबीआई रीजनल हेडक्वाटर से पैसा आता है. एक बैंक अधिकारी के ACCORDING, पिछले एक हफ्ते से झारखंड में कैश फ्लो बेहद कम रहा है. जिसकी वजह से कैश की दिक्कत आ रही है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि दो हजार के नोट अचानक आना कम हो गए. झारखंड में 3500 एटीएम हैं, इनमें से 750 एटीएम तो केवल रांची में हैं. इस बारे में जमशेदपुर के रहने वाले सिद्दार्थ दास ने कहा कि मैंने रांची में अपनी कार रिपेयर करवाई. मैं अलग-अलग इलाकों के करीब 13 ATM घूमा, लेकिन कैश कहीं नहीं मिला. आखिरकार मैंने मैकेनिक को चैक से पेमेंट किया तो वो भी हैरान रह गया.
या तो 2 हजार के नोट है या नोट ही नहीं है. वहीं, कई जगह केवल 200 रुपये के नोट ही निकल रहे हैं. यहां स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि सोमवार को खुद CM SHIVRAJ SINGH CHOHAN ने इसके पीछे साजिश की आशंका जाहिर करते हुए जांच की बात कही है.

उत्तर प्रदेश: नकदी का संकट उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों में सबसे ज्यादा है. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक भी बुलाई. कहा जा रहा है कि सीएम योगी CASH संकट को लेकर कल वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिख सकते हैं.

उत्तराखंड CASH संकट का असर उत्तराखंड में देखने मिला है. यहां ATM में CASH नहीं है. उत्तराखंड के श्रीनगर, रूद्रप्रयाग जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में तो कैश को लेकर हवाला भी हो रहा है. कई दुकानदार तो 1000 रुपये कैश देने के बदले 100 रुपये चार्ज कर रहे हैं.
वहीं, चम्पावत ज़िले में तो बैंक शादी का कार्ड देखकर खाता धारकों को भुगतान कर रहे हैं. बता दें कि कुछ ही दिनों में चारधाम यात्रा शुरु होने वाली है. ऐसे में बैंकों ने अतिरिक्त नकदी की मांग यात्रा सीजन को देखते हुए की है.
गुजरात: गुजरात में 10 दिन पहले ही नकदी की कमी हो गई थी, जिसका असर लोगों को काफी दिनों बाद देखने को मिला. जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों गुजरात के बैंकों ने नकदी निकालने की सीमा तय कर दी थी, फिर भी अब तक वह नकदी की कमी की समस्या से उबर नहीं पाई है.